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Friday, November 19, 2010

दिल्ली सरकार शर्म करो

किसी की मौत कब, कहाँ, और कैसे आएगी यह तो कोई नहीं जानता| लेकिन एक इंसान होने के नाते क्या यह सोचकर हम बैठे रह सकते हैं? पिछले दिनों दिल्ली के लक्ष्मीनगर इलाके में एक ४ मंजिला ईमारत गिरने से लगभग ७० लोग मारे गए| तो क्या इसके लिए यमुना नदी को दोषी ठहराया जा सकता है? आखिर नियम और कानूनों को ताक पर रखकर बिल्डिंग बनाने की इज़ाज़त कैसे दे दी गयी? उसपर विडंबना ये कि बिल्डिंग गिरने के ३ घंटे तक कोई रहत कार्य नहीं पहुँच सका| दिखावे और झूठे शान के नाम पर करोरों रूपये खर्च कर देने वाली दिल्ली सरकार उसी पैसे से ऐसी तकनीक नहीं खरीद सकी जिससे तत्काल मदद पहुंचाई जा सके|

अमेरिकी राष्ट्रपति कि सुरक्षा के लिए उतने पैसे खर्च कर दिए गए जितना उस दुर्घटना में मारे गए लोगों को मुआवजा भी नहीं दिया गया| हमें आश्चर्य होता है कि जब भी ऐसी घटना घटती है तो सभी एक दूसरे पर दोषारोपण करने में लग जाते हैं, जहाँ ज़रूरत इसकी नैतिक ज़िम्मेदारी लेकर पीडितों को हरसंभव मदद पहुंचाने कि थी वहीँ तमाम लोग अपना फायदा ढूँढने में लग गए| हमारी संवेदना उन लोगों के साथ जिन्होंने अपने परिजनों को खोया| हम उनके साथ सहानुभूति रखते हैं जो इस तथाकथित लोकतान्त्रिक व्यवस्था कि भ्रष्ट सरकार की लापरवाही के शिकार बने|

कॉमनवेल्थ गेम्स में हजारो करोर रूपये खर्च कर दुनिया के सामने अपना ग्लोबल इमेज दिखने वाले भारत और दिल्ली की सरकार का यह असली इमेज है जिसे जान बूझकर छुपाने की कोशिश होती है और जिसका खामियाजा आम निर्दोष लोग अपने जान की कीमत देकर चुकाते हैं| इनमे उनलोगों की संख्या ही ज्यादा होती है जो अपना और अपने परिवार के पेट के लिए दो जून की रोटी जुटाने के लिए इन महानगरों की खाक छानते हैं और जानवरों की तरह रहने को भी विवश होते हैं|

बहरहाल जांच के आदेश देने के बाद भी इन रसूख वाले लोगों के चंगुल से सच्चाई कितनी बाहर आ पाएगी इस बात का पता तो आने वाला वक्त ही बताएगा|

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