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Wednesday, March 23, 2011

भगत सिंह: एक शख्सियत नहीं विचारधारा

विश्व इतिहास में देश के लिए त्याग और बलिदान के प्रतीक शहीदे-ए – आजम भगत सिंह का नाम ही उनके परिचय के लिए काफी है| अंग्रेजों के साम्राज्यवादी विस्तार की नीतियों और पूंजीवादी व्यवस्था को प्रश्रय देने वालों के खिलाफ भगत सिंह एक मजबूत चट्टान के रूप में खड़े हुए थे| २३ मार्च १९३१ वह दिन था जब सारे नियम कानूनों को ताक पर रखकर भगत सिंह को साथी राजगुरु और सुखदेव के साथ फाँसी के फंदे पर लटका दिया गया था|

२८ सितम्ब १९०७ को पंजाब के लायलपुर में जन्मे भगत सिंह का पूरा परिवार ही आजादी आंदोलन के संघर्षों में सक्रिय था| इसका ही असर था कि भगत सिंह देश के महानायक बने| इस पूंजीवादी परिवेश में जहाँ हर चीज़ की कीमत तय होती है इन शहीदों के विचारों की कद्र करना हमारे देश के कर्णधार उचित नहीं समझते| जिस व्यक्ति के नाम लेते ही हजारों लोगों की आँखें नाम हो जाती हैं, उनके क्रन्तिकारी विचारों से प्रभावित होकर लाखों युवा सड़कों पर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आज भी उतर आते हैं उन्हें भुलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है| हमें अफ़सोस इस बात का है कि आज जिन विचारों की देश को सबसे ज्यादा ज़रूरत थी उन्ही विचारों को जड़ से मिटने की कोशिशें हो रही हैं|

आज जबकि देश में आर्थिक असमानता दिन ब दिन बढती जा रही है, घोटाले, भ्रष्टाचार और लूट में पूरा देश लिप्त है, आपसी भेदभाव पुरे समाज को पीछे धकेल रहा है, आम लोग चाहकर भी विरोध में आवाजें नहीं उठा पाते ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भगत सिंह और उनके साथियों की क्रन्तिकारी विचारधारा एक नई ऊर्जा प्रदान करती है अन्याय और अत्याचार के खिलाफ एकजुट होने में सहायक हो सकती है| भगत सिंह जिस साम्राज्यवादी व्यवस्था के खिलाफ लड़ते रहे आज हमारी व्यवस्था उसी साम्राज्यवाद की पिछलग्गू बन गयी है|

किसी देश की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने देश के नायकों को किस तरह से याद करता है| भगत सिंह को प्रायः एक क्रन्तिकारी योद्धा के रूप में याद किया जाता है जबकि सच्चाइ यह भी भगत सिंह एक व्यक्ति के अलावा एक विचारधारा के तौर पर हमरे बीच उपस्थित हैं| लेकिन उनके इसी चेहरे को छुपाने की कोशिश हो रही है| आज आज़ादी के इतने सालों बाद भी उनके विचारोंं की प्रासंगिकता कायम है| समाज और देश के विकास की घरी समझ और कार्ययोजना उनके अंदर विकसित थी| उनकी जीवनी दुर्लभ दस्तावेज़ का रूप ले चुकी है सिर्फ़ और सिर्फ़ देश के शासकों के नजरिये के कारण| क्योंकि अगर भगत सिंह की विचारधारा से प्रभावित होकर लोग जागरूक होकर इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ एकत्रित हो गए फिर ऐसी क्रांति होगी जिसे रोकना किसी भी सरकार के लिए संभव नही होगा|

भगत सिंह को याद करने की सार्थकता तभी है जब हम उनके विचारों को अमल में लायें और भारत को एक समाजवादी गणतंत्र बनाने की पहल करें|

गिरिजेश कुमार

3 comments:

यशवन्त माथुर said...

आपके विचारों से सहमत हूँ दोस्त!

योगेन्द्र पाल said...

भ्रष्टाचार के खिलाफ फिर से कुछ भगत सिंह चाहिए

अब कोई ब्लोगर नहीं लगायेगा गलत टैग !!!

शिवकुमार ( शिवा) said...

आज भी हमारे समाज को भ्रष्टाचार के खिलाफ फिर से कुछ भगत सिंह चाहिए..बहुत सुंदर लेख

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