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Tuesday, November 15, 2022

सेंट्रल टेक्सास में लक्जरी घर खरीदने में सबसे आगे हैं भारतीय


नई दिल्ली। ऑस्टिन बोर्ड ऑफ रियल्टर्स द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के सेंट्रल टेक्सास में घर खरीदने में दुनिया में सबसे आगे भारतीय हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब भारतीय मूल के लोगों ने दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले टेक्सास में सबसे ज्यादा घर खरीदा है। 

सेंट्रल टेक्सास इंटरनेशनल होमबॉयर्स रिपोर्ट 2022 अंतर्राष्ट्रीय होमबॉयर्स भारत के लोगों का हिस्सा 21 फीसदी है। जो सबसे अधिक है। इसके बाद मेक्सिको का स्थान है वहां के लोगों का 10 फीसदी हिस्सा है। चीनके 6 फीसदी व कनाडा के 4 फीसदीलोगों ने घर खरीदा है। 

41 फीसदी भारतीय हैं 
ग्रेटर ऑस्टिन एशियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के अनुसार, ग्रेटर ऑस्टिन में 1.65 लाख एशियाई अमेरिकी व्यक्ति रहते हैं जिसमें 41 प्रतिशत भारतीय हैं। यह वर्ष 2010 के मुकाबले 30 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार ऑस्टिन के तकनीकी क्षेत्र में वृद्धि की वजह से भारतीय घर खरीदारों की संख्या बढ़ रही है।  

भारत से ज्यादातर विदेशी खरीदार संपत्ति खरीदने के लिए अमेरिकी मॉर्गेज फाइनेंसिंग (82 फीसदी) का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 12 फीसदी खरीदारी पूरी तरह से नकद होती है। 

विलियमसन काउंटी भारतीयों की पसंद
टेक्सास में विलियमसन काउंटी भारतीयों की सबसे ज्यादा पसंद है। यहां 53 फीसदी भारतीयों ने घर खरीदा है। इसके बाद ऑस्टिन शहर के अंदर ट्रेविस काउंटी में 24 प्रतिशत, ऑस्टिन शहर के बाहर 18 प्रतिशत और हेस काउंटी में छह प्रतिशत की खरीदारी हुई है। अंतरराष्ट्रीय होमबॉयर्स ने अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक ग्रेटर ऑस्टिन क्षेत्र में संपत्तियों पर 61.3 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं। 

सेंट्रल टेक्सास, न्यूयॉर्क और फ्रांसिस्को जैसे महानगरों का विकल्प
रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल टेक्सास भारतीय घर खरीदारों के लिए न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को जैसे महंगे महानगरीय क्षेत्रों का विकल्प प्रदान करता है। यहां अपार्टमेंट से लेकर एकल-परिवार के लिए घरों की सुविधा उपलब्ध है। अंतर्राष्ट्रीय होमबॉयर्स में गैर-अमेरिकी नागरिक शामिल हैं जो यहां ग्रीन कार्ड पर हैं या यहां विदेशी कार्य या छात्र वीजा पर हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आधे से अधिक विदेशी खरीदारों के पास अमेरिकी ग्रीन कार्ड है, जो दर्शाता है कि वे वैध स्थायी निवासी हैं।

भारतीयों ने किस तरह के घर खरीदे

सिंगल फैमिली होम प्रॉपर्टी- 94 %
आवासीय भूमि 6%
प्राथमिक आवास के लिए 59 फीसदी खरीदारी
35 फीसदी घरों का उपयोग किराये के लिए किया जा रहा
6 फीसदी लोगों ने अन्य कामों के लिए खरीदारी की
घरों की औसत कीमत- 513900 डॉलर( 4.17 करोड़ रुपए से अधिक) 

Sunday, November 13, 2022

पांच साल बाद दुनिया को मिलेगी सबसे घातक हाईपरसोनिक मिसाइल

नई दिल्ली। पांच साल बाद, 2027 में दुनिया को सबसे घातक हाईपरसोनिक मिसाइल मिलेगी। नई हाईपरसोनिक अटैक क्रूज मिसाइल(एचएसीएम) वर्तमान मिसाइल से 20 गुना तेजी से उड़ान भरेगी। इस मिसाइल से दुश्मनों को बचने का मौका नहीं मिलेगा। यह अपनी तरह का पहला मिसाइल होगा जो एयर-ब्रीदिंग स्क्रैमजेट इंजन का इस्तेमाल करेगा। अमेरिका और आस्ट्रेलिया के लिए यह मिसाइल निर्माण किया जा रहा है। 


अमेरिकी कंपनी कर रही निर्माण 

मिसाइल का निर्माण अमेरिकी कंपनी रेथियॉन और नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन करेगी। कंपनी 98.5 करोड़ डॉलर से हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करेगी। संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लिए विकसित किया जानेवाले यह मिसाइल जमीन पर हमले के लिए डिज़ाइन किया गया है। अनुबंध की शर्तों के तहत, अमेरिका को 2027 में पहली मिसाइल मिलेगी।  2020 में, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त रूप से साउदर्न क्रॉस इंटीग्रेटेड फ़्लाइट रिसर्च एक्सपेरिमेंट पार्टनरशिप(एससीआईफायर) की शुरुआत की। ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय ध्वज पर दिखाई देने वाले नक्षत्र के नाम पर एससीआईफायर का उद्देश्य एक एयर-ब्रीदिंग हाइपरसोनिक हथियार प्रणाली विकसित करना था।  

 क्या है पारंपरिक क्रूज मिसाइल
पारंपरिक क्रूज मिसाइल मूल रूप से पायलट रहित विमान हैं। टर्बोफैन इंजन क्रूज मिसाइलों को शक्ति प्रदान करते हैं। राडार से बचने के लिए क्रूज मिसाइलें कम उंचाई पर उड़ती हैं। टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें 550 मील प्रति घंटे की गति से 98 से 164 फीट की ऊंचाई पर उड़ती हैं।

हाईपरसोनिक मिसाइल
एचएसीएम एक हाइपरसोनिक हथियार है, जिसका अर्थ है कि ध्वनि की गति से 5 गुना तेज गति गति से उड़ान भरता है। अधिकांश मिसाइलें लगभग मच 3(ध्वनि की गति से 3 गुना अधिक) तेजी से उड़ान भरती हैं।  टर्बोफैन इंजन की तरह, स्क्रैमजेट ईंधन के के लिए आसपास के वातावरण से ऑक्सीजन लेते हैं। नासा के अनुसार, स्क्रैमजेट इंजनों को कम से कम 15 मच तक काम करना चाहिए। यह प्रति घंटे 11,509 मील की दूरी तय करता है, या लगभग दो घंटे में पृथ्वी का चक्कर लगा सकता है। 

अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन भारत में रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में काम कर रही
भारत के एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र के लिए रेथियॉन टेक्नोलॉजी काम कर रही है। 1940 के दशक से ही कंपनी काम कर रही है। कंपनी मेक इन इंडिया के तहत नेट जीरो एमिशन की दिशा में देश की मदद करने के लिए स्थानीय स्तर पर उत्पादों को विकसित करने के लिए भारत में स्थित फर्मों के साथ साझेदारी कर रही है। यहां 5 हजार से ज्यादा कर्मचारी आधुनिक हथियार बनाने में लगे हैं।

Saturday, November 12, 2022

मिसाइल हमले में बची सात साल की इस बच्ची की प्रतिभा ने दुनिया को चौंकाया

नई दिल्ली। सीरिया की मूल निवासी सात साल की बच्ची शम अल बकर ने दुबई ओपेरा में अरब रीडिंग चैंपियन का खिताब जीता है। वह जब सिर्फ छह माह की थी, तब सीरिया में गृहयुद्ध के दौरान पिता के साथ कार में यात्रा करते हुए एक मिसाइल आक्रमण में बच गई थी। हालांकि, इस घटना में उसके पिता की मौत हो गई थी। अरब रीडिंग चैंपियन बनने पर उसे पांच लाख दिराम (एक करोड़ रुपये से अधिक) की राशि पुरस्कार के तौर पर मिली है। 

(मिसाइल हमले में बची बच्ची के साथ दुबई के शासक)

बकर ने यह खिताब 44 देशों के 22.27 मिलियन (करीब सवा दो करोड़) बच्चों के बीच सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए जीता। संयुक्त अरब अमीरात के उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने उसे पुरस्कृत किया। दुबई के शासक शेख मोहम्मद ने कहा कि अरब रीडिंग चैलेंज एक ऐसी सभ्यता का निर्माण करने प्रतियोगिता है जो किताबों के माध्यम से शुरू होती है। हमारा लक्ष्य है कि हर घर में कम से कम एक पाठक हो। हम हमारे अरब युवाओं के लिए बिना पढ़े और ज्ञान के बेहतर भविष्य का निर्माण नहीं कर सकते।

70 किताबें पढ़ीं प्रतियोगिता जीतने के लिए
प्रतियोगिता जीतने के लिए बकर ने 70 किताबें पढ़ीं। उसने कहा, 'मुझे पढ़ना पसंद है, क्योंकि ऐसा बहुत कुछ है जिसे आप सीख सकते हैं ताकि सफल हो सकें। मैं सभी बच्चों को इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आमंत्रित करती हूं, क्योंकि यह बहुत ही फायदेमंद है।' जूरी के एक सवाल के जवाब में उसने कहा, एक किताब को तीन बार पढ़ना तीन किताबों को एक बार पढ़ने से बेहतर है। इससे हम सीख सकते हैं और अपने जीवन में लागू कर सकते हैं।


ट्यूनिशिया के एडम दूसरे स्थान पर

ट्यूनीशिया के एडम अल कासिमी पढ़ने की चुनौती में दूसरे स्थान पर रहे, जबकि जॉर्डन के राशिद अल खतीब ने तीसरा स्थान हासिल किया। एडम को एक लाख दिराम (20 लाख रुपए से अधिक) और राशिद को 70 हजार दिराम (करीब 15 लाख रुपए) का नकद पुरस्कार दिया गया।